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Hymn No. 2043 | Date: 21-Oct-2000
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बहुत कुछ ऐसा है तेरे बारे में जिससे अनजान हूँ मैं।
बहुत कुछ ऐसा है तेरे बारे में जिससे अनजान हूँ मैं।
तू जाने सब कुछ मेरे बारे में, मैं जानता नही हूँ कुछ।
ऐसा न था छुपाया कुछ हमसे, हमको जानना न आया।
बहुत बार की कोशिश पर मन ने न दिया कभी साथ पूरा।
फिर भी है विश्वास आये राह में चाहे कितनी भी मुश्किलें।
जिसे कर न सके थे उसे पूरा कर दिखायेगे दिल से।
हिलमिल जाऊँगा तुझमें इतना, फिर न होगी, जरूरत मिलने की।
होगे कहने को दो तन मन, पर इक् जान बन जायेगे हम।
किसी एक के दिल में उभरेगी कोई बात, होगी जुबाँ पे दूजे के।
वो अगर् श्वास लेगा तो धड़केगा दिल मेरा, विश्वास होते मिट जायेगे भेद।


- डॉ.संतोष सिंह