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Hymn No. 2047 | Date: 24-Oct-2000
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ऐसा हाल क्यूँ हो रहा है मेरा, रहके तेरे पास तड़प रहा हूँ।
ऐसा हाल क्यूँ हो रहा है मेरा, रहके तेरे पास तड़प रहा हूँ।
जो मिलनी चाहिये खुशी न वो मिलके दुखी हुये जा रहा हूँ।
तक्षण चमत्कार की आस न लगाये बैठा हूँ पर रमता रहूँ मस्ती में।
सारी हदें तोड़के गूजरते रहना चाहता हूँ, तेरे प्यार की मस्ती में।
जब भी तेरे सामने हाथ जोडूँ, जुड़ जाये मेरा दिल तेरे दिल से।
जो भी आज भेद है तेरे मेरे बीचके उसे खत्म कर देना चाहता हूँ।
बहुत बताया तेरे बारे में दुनिया को, अब खुद जाननां चाहता हूँ तुझसे।
तेरा दुत्कार मंजूर है, किये न किये से, पर हटके हर जुर्म कबूल है।
सुंदर सत्य होके रहा है तू शाश्वत सदा, जानपे ना हो पाये फिदा हम।
इससे बड़ा कौन सा गम होगा हमें, तेरे पास रहके रम न पाये तुझमें।


- डॉ.संतोष सिंह