VIEW HYMN

Hymn No. 2048 | Date: 25-Oct-2000
Text Size
धीरे – धीरे इतना गहरा पैठ बनाता चला जाऊँ दिल में तेरे।
धीरे – धीरे इतना गहरा पैठ बनाता चला जाऊँ दिल में तेरे।
होश न रहे हमको कुछ भी, डूब जाये दिल में तेरे।
वहाँ हो गूंज अंतर की, उठे न कोई सोच मन में तेरे सिवाय।
दिल की तरंग दिल से टकराये कहने की न हो कोई जरूरत।
चलने को चलता रहे दौर आशिकी का, और ना हो कोई शोर – शराबा।
मन का मोर करे नृत्य तेरे आगे पीछे, बहाते रहना तू प्यार की बहार।
दीवानगी का आलम हो एक एक करके, मिटता चले जाये भेद सारे।
मारे है हम तेरे प्यार के, जकड़ के रखना तू अपना प्यार बनाके।
जो भी बना के रख ले पास अपने, स्वीकार है हमें तहे दिल से।
आगाज करके करना वार प्यार का, दे देंगे जाँ पीछे हटने का न लेगे नाम।


- डॉ.संतोष सिंह