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Hymn No. 2050 | Date: 26-Oct-2000
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कितना भी नजर भरके देख तुझे, भरता नहीं दिल मेरा।
कितना भी नजर भरके देख तुझे, भरता नहीं दिल मेरा।
जी चाहता है एकटक देखते हुये, हो जाऊँ निःश्वास में।
फिर भी बात मेरी बनती नहीं, न जाने कहाँ कर जाता हूँ चूक।
रूकावटें कोई और डालता नहीं, रूक जाता हूँ मैं खुद।
ऐं खुदा कब होगी आरजू स्वीकार तेरे चरणों में ।
मैं तड़पना चाहता हूँ इतना, ढल जाऊँ तड़प बनके तेरे वास्ते।
मिशाल न कोई कायम करनी है, पर तेरे काम तो आ जाऊँ।
महत्त्व न होगा मेरा कुछ, पर तेरी निशानी तो बन जाऊँ।
जताना है अब बस तुझसे, तेरे दिल में जो आ जाये वो करते जाना।


- डॉ.संतोष सिंह