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Hymn No. 2051 | Date: 28-Oct-2000
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याद आते ही तेरी बह जाता हूँ यारो में।
याद आते ही तेरी बह जाता हूँ यारो में।
कसक इतनी है डूबा रहता हूँ दिन को ख्वाबों में।
ख्याल तो इतने है डूबाते है हर पल प्यार के प्यालों में।
दोष है कितना भी, जो होता न है हमको होश अपना।
जप कैसे करूं तेरा, जब हो तू प्यार मेरा।
हद् हो गयी है दीवानगी की, बिन् परवानगी मांगे मिलना।
हालात हो कैसे भी, खूबसूरत है मेरे वास्ते प्यार में तेरे।
चाहते है चाहे आये कैसे भी दौर, जारी रखना तू प्यार का जोर।
मन मोर बनके नाचता रहे, तेरे प्रेम रस में भीगते हुये।
अधाना बंद हो ना मेरा, जब तक धूल के मिल न जाऊँ तुझमें।


- डॉ.संतोष सिंह