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Hymn No. 2052 | Date: 30-Oct-2000
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जोर होता है जब इश्क का, तब कोई न शोर होता है मन में।
जोर होता है जब इश्क का, तब कोई न शोर होता है मन में।
तन का रोम रोम गुलजार होता है, दिल का हर कोना घिर जाता है उमंगो में।
रग में बह उठती है प्यार की लहू, तन के हर हिस्से में पल यार के साथ।
यार फूटे न फूटे बोल प्यार में, मसरुफ रहता हूँ हर पल यार के साथ।
छेड़ती है दुनिया कहके तब मजनू, पर उसे नहीं होता होश प्यार के सिवाय किसीका।
दीवाना बन जाता है प्यार के पीछे, हर हाल में होता है मस्त प्यार में।
मजबूर होता है प्यार के हाथों, परवाना बनके होता है खाक यार के पीछे।
शमा कहो या साकी कम तो हें इक् सा, इक् जलाके खाक करे, इक पिलाके होश उड़ाये।
मजनूँ तो है मजलूम प्यार में, जात है जान प्यार में वो छोड़ वही साथ प्यार का।
खाकसार जिंदा ही होता है खाक में चूंकि होता है हर रंग बेअसर प्यार में।
- डॉ.संतोष सिंह
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