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Hymn No. 2054 | Date: 31-Oct-2000
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जला दे दिल में ज्योत तेरे प्यार की, तिर उठे रोम रोम प्यार में तेरे।
जला दे दिल में ज्योत तेरे प्यार की, तिर उठे रोम रोम प्यार में तेरे।
उन्मुक्त होके गाऊँ गीत तेरे, स्वच्छंदता से फिरता रहूँ सारे जहाँ में।
हो न किसी से अपना कोई राग, दिन रात जलता रहूँ प्यार में तेरे
रातों रात न मिले चैन दिन को बेचैन, तड़पता फिरूं हर पल प्यार में तेरे।
जलके न होने देना तू खाक विचित्र हो हालात मेरे प्रियतम् प्यार में तेरे।
शरमा जाये देखके हालत मेरी दीवानगी, उड़ा जाये होश परवानों का।
तब भी न हो किसीका कोई दोष, ये तो प्यार के जोश का है कमाल।
सून ले मेरे दिल की पुकार तू, पूरी करनी होगी तुझे आज की आज।
गिरे चाहे कैसे भी गाज प्यार में, प्यार करने से न आऊँगा बाज।
इम्तहां दूंगा इंतजार का करूंगा पार हर रुकावटो को, आऊँगा पर पास तेरे आज।


- डॉ.संतोष सिंह