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Hymn No. 2055 | Date: 31-Oct-2000
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दूर-दूर-दूर जितना होता जाऊँ तुझसे दूर, जुड़ते जाये ख्याल उतने ही तुझसे।
दूर-दूर-दूर जितना होता जाऊँ तुझसे दूर, जुड़ते जाये ख्याल उतने ही तुझसे।
जो नजदीक रहके न पा सका, अनायास मिलता गया दूर रहने पे तुझसे।
मेरे मन ने न माना कभी की हुआ मैं दूर तुझसे रहा चाहे जग में कही भी।
दिल तेरे पास रहने पे न कभी तड़पा था, दूर होते रो पडा अहसास करके तेरा।
सर्द हो गया था जिस्म मेरा कोई भाव न था, निकल जानेका।
जानू आ गयी जानम दूर होते ही तुझसे।
लोगों की नजरों में दूरी का कोई और पर्याय, पर मेरे प्यार को जिंदा रखने के वास्ते है जरूरी।
तेरे पास रहने की बात है बड़ी पर दूर रहके धड़कता है दिल तेरे वास्ते।
ख्वाबों को बदला सका हकीकत में तेरे साथ रहके, कर दिखाया तेरा चाहा हुआ दूर रहके।
बात बनती रही तेरे पास रहने पे, बात बिगड़ी नहीं रहे चाहे दूर कितना भी तुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह