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Hymn No. 2056 | Date: 03-Nov-2000
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दिल की बात, कैसे रहने दूँ दिल में जब हो सामने तू मेरे।
दिल की बात, कैसे रहने दूँ दिल में जब हो सामने तू मेरे।
फड़क उठते है लब आप बिती तुझको सुनाने के वास्ते।
आता नहीं मन को चैन, जब तक ना कह लूँ दिल की हर बात अपने।
स्वपनवत् लगता है जब तक तुझसे न करता हूँ पूरी बात अपनी।
मन हो कही और तो भी लगे उसका जी बस तुझमे।
कसमें लाख खाके तोड़ी होगी, पर तेरे साथ छोड़ने का कभी न सोचा।
ओच्छी है हर वो बात जो दूर ले जाये तुझको मुझसे।
मान या न मान मैं होऊँगा तो तेरा या तो किसी और का नहीं।
दिल भी खिल उठता है जब करता हूँ ध्यान तेरी उपस्थिती का।
जब तक हूँ तेरे साथ, कोई और को न चाहता हूँ कभी भी।


- डॉ.संतोष सिंह