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Hymn No. 2058 | Date: 04-Nov-2000
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कर लो कितना भी कुछ आयेगा ना काम, प्रभु के नाम के सिवाय।
कर लो कितना भी कुछ आयेगा ना काम, प्रभु के नाम के सिवाय।
कितना भी कुछ पा लो न है उसका दाम, प्रभु के काम के सिवाय।
चला लो कितना भी जोर किसी पर, प्रभु पर चलता है जोर तो सिर्फ प्रेम, पुरषार्थ का।
रिझाना उसको सबके बस कि बात नहीं, इक् दो नहीं न जाने देने पड़ते है कितने इम्तहाँ।
आह निकलने पे करनी पड़ती है वाह उसकी, आँखों ही आँखों में पीना पड़ता है आँसू।
इश्क करने वालों का कभी होता नही, बनना पड़ता है आशिक उनके वास्ते।
किसी नयी धुन में पिरोके गाना पड़ता है कोई गीत नया हरने के लिये उसके दिल को।
चलती नहीं कोई उस पर मरजी, चलना पड़ता है ताउम्र उसकी मरजी से।
इतने पर भी मान जाये तो समझो बिगड़ा हुआँ काम एक साथ बन जाये।


- डॉ.संतोष सिंह