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Hymn No. 2059 | Date: 04-Nov-2000
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होने को तो होता है बहुत कुछ, पर हुआ ना है जिसके होने से, होने को रह नहीं जाता कुछ।
होने को तो होता है बहुत कुछ, पर हुआ ना है जिसके होने से, होने को रह नहीं जाता कुछ।
जीवन में जब बन चुका हो वो सब कुछ तो रहके सब कुछ हमारे हाथों में रहता नहीं तब कुछ।
खेल चलता रहता है जीवन में जब तक होता नहीं मेल, तोड़ने टूटे ना से जेल परम के बिना पुरूष।
दिल में प्रगटाना पड़ता है प्यार, श्रध्दा के घी में विश्वास की बाती के सहारे मन के झांझावातों से।
कितना भी कर लो कुछ होता नही तब तक, जब तक सद्गुरू हाथ पकड़के प्यार से सिखाता नहीं करू।
डरने से हुआ हुआ भी बिगड़ जाता है, निडर भी खो देता है होश अतिजोश में बनके रहना पड़ता है
मौज में वो जीते है जिनका दिल जुड़ा रहता हें प्यार से, कोई भी बात पनपा नहीं पाती रोष जल्दी से
यहाँ से वहाँ तक जहाँ देखो जहाँ में वहाँ तक रहता है वो ही वो, उसके बिना होता नहीं सारे जहाँ में कुछ
जानते है सब कुछ फिर भी जाने हुये को मानता नही मन, आदतों के चलते देनी पड़ती है शहादत बार बार
जब तक खुद को खोने का डर मिटेगा नही अंतर में से, कितना भी साथ रहके उसके पा नहीं सकते उसे।


- डॉ.संतोष सिंह