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Hymn No. 2060 | Date: 04-Nov-2000
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मैं तो दिल वाला बनके खिलना चाहता हूँ प्यार में तेरे।
मैं तो दिल वाला बनके खिलना चाहता हूँ प्यार में तेरे।
तू मार दे या तार दे बनना चाहता हूँ प्यार बनके गले का हार तेरे।
खार होगा कितना भी मन में मेरे, पर कली बनके खिलुं आंगन में तेरे।
हो ना ओर छोर मेरे प्यार का, डूब जाये जीवन सारा प्यार में तेरे।
पीने और पिलाने के सीवाय कोई बात ना हो, चाहे मुहाल हो जाये जीना मेरा।
साये भी समय के कारण से मिलके बिछुड़ते है हम से जब – तब।
तुझसे मिलन हो तो ना हो बिछुड़ना, भले भूल जाये दिल मेरा धड़कना।
अँग़डाई लेता रहे मेरा प्यार हर वक्त, जैसे सुबह की हलिक धूप।
छूप जाऊँ तेरे बाहो में, रह न जाये कुछ भी मेरे ख्वाबों में देखा हुआ।


- डॉ.संतोष सिंह