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Hymn No. 2062 | Date: 06-Nov-2000
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ढलती जाये रात पल पल, आँखों में न आये नींद।
ढलती जाये रात पल पल, आँखों में न आये नींद।
बैठा हूँ इस उम्मीद में, न जाने कब हो जाये मुलाकात।
रहूँ मैं कही भी संसार में, अहसास कराता है वो मुझको।
दंग हो जाता हूँ जब आता है ध्यान अपने ऊपर रंगा देखता हूँ प्यार में।
लगता नहीं मन किसी में, खोजता हूँ न जाने कहाँ कहाँ उसको।
रहा नहीं जाता बिन उसके, हर बात कहे बिना रह नहीं पाता।
लगता है अच्छा सताना उसका, गीतों में ढालके दिल की बात बताना।
अंदाज इतना न्यार है बिन जाने कैसे उमड़ पड़ता है प्यार भीतर से।
सके न पाता हूँ छलक पड़ते है आँसू नयनों से।
मिटने के बजाय बढ जाती है कसक और उससे मिलने पे।


- डॉ.संतोष सिंह