Hymn No. 202 | Date: 10-Jul-1998
भज ले; भज ले, भज ले तू प्रभु को, जब तक साँस है तब तक तू भज ले प्रभु को;
भज ले; भज ले, भज ले तू प्रभु को, जब तक साँस है तब तक तू भज ले प्रभु को; बाद में तेरे हाथ में ना कुछ रह जायेगा, लिया है जितने पल तूने उसका नाम, उतने ही तू निकट उसके जायेगा, भज ले, भज ले, भज ले, तू प्रभु को । पछताने से कुछ नहीं होता है, बिन क्षण गवाये तू ले ले उसका नाम; जो भी तूने किया है जतन, सब धरा का धरा रह जायेगा सिवाय उसके जब तू उसके पास जायेगा, तो उसका नाम ही काम आयेगा भज ले, भज ले, भज ले वो वहीं का वहीं ही रहता है, आना – जाना लगा रहता है हम सबका, बीत रहा है सब कुछ इस संसार में, चंद्र हो या सूर्य या फिर ये संसार, जो हो गया उसका, वो टूट जाता है हर बंधन से, भज ले, भज ले, जो भी तूने अब तक किया, चाहे वो अच्छा हो या बुरा, नाम लेते ही वो उसका हो जाता है तू हर एक कर्मों के बंधन से मुक्त हो जायेगा, जब तू दिन – रात पीयेंगा उसके नाम का जाम मस्त रहेगा तू अपने आप में, आँखों में होगा सुरूर उसके प्यार का भज ले, भज ले, भज ले
- डॉ.संतोष सिंह
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