VIEW HYMN

Hymn No. 203 | Date: 10-Jul-1998
Text Size
श्वास की ना है परवाह, मेरा तन – मन होता है छिन्न - भिन्न;
श्वास की ना है परवाह, मेरा तन – मन होता है छिन्न - भिन्न;
हो जाने दे, मैं तो दौडूँगा बेतहासा, बिना परवाह किये किसीकी।
तेरे दर की ओर, छिलते रहेंगे मेरे पैर, मैं कट – कट के गिर जाऊँगा,
मर जाऊँगा मैं रास्ते में, तेरे दर पे पहुँच जाऊँगा तू बनके ।
मुझे नहीं है जीना मैं – मैं करके, मेरे मैं को मैं तूझे ही सौपता हूँ ।
तूझे जो करना है वो तू कर, मुझे मिटाके अगर तुझे गले लगाना है;
तो तू लगा ले, मुझे ना करनी है अपनी परवाह, परवाह तो अब बस तेरी है।
बनना – बिगडना मेरा क्या अब होना है, ना ही इसकी कोई खुशी और गम है;।
अब तो मेरा दम तुझमें है, जो तेरा होना है वहीं मेरा होगा,
तू सलामत रहे, मुझ जैसे लाखों लाख हर पल होते रहे तुझपे कुर्बान ।


- डॉ.संतोष सिंह