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Hymn No. 2072 | Date: 14-Nov-2000
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दे दे तू जीवन में कितनी भी पीड़ा पर रहूँ मैं प्रियतम् तुझसे जुड़ा।
दे दे तू जीवन में कितनी भी पीड़ा पर रहूँ मैं प्रियतम् तुझसे जुड़ा।
लड़ लूंगा मैं सारे जहाँ से पर तेरी वक्र दृष्टि सह न पाऊँगा पल भर को।
बहुत हद तक न गायने लगता है सुख दुख मेरे वास्ते पर आने पर हो जाती है यु।
पर प्रियतम् इक् पल को अलग ना हो सकता हूँ तुझसे तू मान या न मान।
आग पर से चलके आना पडा तो आऊँगा, इक बार नहीं कोई बार पास तेरे।
पर संसार में रहके तुझसे दूर रहना पड़ा तो रह नहीं, पाऊँगा पल भर को।
गाने से तेरे गीत बाज नहीं आऊँगा, चाहे शब्द निकले कितने भी उल्टे पुल्टे
चाहे गुथना पड़े जीवन के हर इक् पल को तेरे नाम से गुजरता रहूँ किसी भी दौर से।
ये भी अहसास है दिल को देर ना है तेरी ओर से देर कर रहा हूँ मैं।
पर जब तू चाहेगा आ जायेगा सवेरा जीवन में गैर, दे दें करने का सार्मर्थ्य तू मुझको।


- डॉ.संतोष सिंह