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Hymn No. 2076 | Date: 16-Nov-2000
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तेरी मर्जी है तो मिटा दे एतराज मेरे मन का।
तेरी मर्जी है तो मिटा दे एतराज मेरे मन का।
पल भर को ना खोऊँ सुकुंन इतना डूबा रहूं प्यार में तेरे।
तेरे शान के कसीदे पढ - पढकें सुनाता रहूँ सारे जग को।
अहसास रहे दिल को ना ही कुछ और का।
जो भी हो मेरे साथ में, मनाऊँ मौज मैं तेरे संग।
रंग चढे तेरे प्यार का ऐसा, कर ना सके कोई भंग इसे।
पुलकित होता रहे मन मेरा, तोड़ दूं प्यार के हर पैमाने को।
मयखाने जाने की ना हो जरूरत चढे कुछ ऐसा नशा।
दशा मेरी देखके करे लोग तौबा, फिर भी रहूँ मस्त मैं।
अस्त हो जाये जीवन का सूरज, पस्त ना हो मेरा प्यार कभी।


- डॉ.संतोष सिंह