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Hymn No. 2081 | Date: 20-Nov-2000
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रिश्तों में है रिश्ता सबसे बड़ा रिश्ता प्यार का।
रिश्तों में है रिश्ता सबसे बड़ा रिश्ता प्यार का।
जन्म से मिले हुये रिश्ते जुड़े हुये होते है लगाव से।
पर प्यार का रिश्ता बनता है प्यार करने से।
हो जाता है कभी भी, तोड़ देता है सारे बंधनो को।
जो बंधता नहीं उस प्रभु को बांध देते है प्यार में।
हर भेद मिट जाता है पर मान करते है दिल से।
मुरझाया हुआ भी खिल उठता है प्यार होने पे।
मिटता है सब कुछ संसार में, पर मिटना नहीं कभी प्यार।
प्यार का वार ना खेल पाये कोई, करे एक ही वार में तमाम।
परम के पास पहुँचाने के कार्य को प्यार देता है अंजाम।
होती है छेड़ छाड़ प्यार में, चलता है दौर मस्ती का।
कोई भी रिश्ता हो प्यार के बिना लगता है बेजान सा।
दान में ना मिलता कभी, हाँ बरसता है सद्गुरूकी कृपा से।
प्यार होने पे ही मिलता है दिल को परम आनंद।


- डॉ.संतोष सिंह