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Hymn No. 2082 | Date: 22-Nov-2000
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इश्क का मारा लेके तेरे नाम का सहारा, फिरता है इधर उधर ।
इश्क का मारा लेके तेरे नाम का सहारा, फिरता है इधर उधर ।
तेरे सिवाय गंवारा ना है कुछ भी, संवारा हैं तूने अपना प्यार देके।
मुनासिब ना है किसी और के होने का, नसीब में लिख देना चाहे नाम तेरा।
होगा ना किसी काम का कुछ भी करके पी लेते है जाम तेरे नाम का।
दाम देने की हालत तो नही है, हर हाल में रहके कर लेना चाहे तुझको प्यार।
दामन में होगे कांटे हजार, बढ़ते कदमों के आगे बिछाऊँगा दिल अपना।
जागते सपनों की कोई बात करता नहीं, पर तेरे इंतजार में दूंगा हर इम्तहा।
जान हथेली पे लेके फिरता नहीं, पर तेरे वास्ते खेल जाऊँगा जा पे अपने।
नामुरीद इतना भी नहीं अपने मुरीद के लिये मुश्किलात पेश करूं तेरे सामने।
खसकने ना दूंगा हाथों से अपने तुझे, चाहे पग पग पे दुनिया की रुसवाई पड़े झेलना।


- डॉ.संतोष सिंह