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Hymn No. 2084 | Date: 25-Nov-2000
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प्यार की कसक लो इतनी तीव्र हो जाये खत्म मन की सारी हिचक।
प्यार की कसक लो इतनी तीव्र हो जाये खत्म मन की सारी हिचक।
यादों में खोते तेरे बह निकले इतने आँसु, बदल जाये ख्वाब सारे हकीकत में।
दिल की हर धड़कन से गूंजे नाम तेरा, मिट जाये तेरे मेरे बीच की दूरी।
हर श्वास में हो बस तेरे ख्याल रोम रोम भीग उठेगा तेरे परम प्रेम में भीग के।
जले मेरा अंग अंग तेरे प्यार की आग में, खाकसार के बिना तुम भीना रह पाओंगे।
गुनगुनाता रहेगा हर पल तेरे गीत, जीते जी तुझको तुझसे चुरा ले जाऊँगा।
होगी नजरों में तेरे नजर की छवि क्या कही भी ही नजर पर तेरी नजर को ना भला पाऊँगा।
बसाऊँगा तुझे अपने हृद्य में पुरूषार्थ करके, मेरी पहचान बन जायेगी तेरी कृपा को मुस्कान से।
आराधना करूंगा रात दिन एक एक करके, मेरी साधना ना होगी कभी खंडित।
जो भी मिले हो उसमे तेरी सजा, तो फिर कभी मैं की दाल ना चुरनें दुंगा तेरी हांड़ी में।


- डॉ.संतोष सिंह