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Hymn No. 2086 | Date: 28-Nov-2000
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मेरे मन के डर को तू डराके भगा दे।
मेरे मन के डर को तू डराके भगा दे।
दिल में लगी प्यार की आग को प्यार की आग देके भड़का दे।
निर्मूल हो जाये सारी शंका, विश्वास के बीज को सींच दे।
बरसा इतनी कृपा पल भर को ना भुलूं नाम तेरा।
पुरूषार्थ के पथ पे चलके करूं तेरा वरण।
अनासक्त होके करूं चाहे कोई करम, लू शरण तेरे चरणों में।
डिगने न पाये कभी कदम तेरे बताये मार्ग से।
तारतम्यता इतनी हो पल भर के बिछोह को कबूल न करूँ।
तिलांजलि दे दूं अपनी सारी जरूरतों को, बन जाऊँ तेरी जरूरत।
समरस हो जाये जिंदगी तेरे प्यार रस में डूबके।


- डॉ.संतोष सिंह