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Hymn No. 2088 | Date: 29-Nov-2000
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प्यार ही प्यार है सारे संसार में, तो क्यूँ मायाजाल का है छदम आवरंण।
प्यार ही प्यार है सारे संसार में, तो क्यूँ मायाजाल का है छदम आवरंण।
कर दे तू निवारण हमारे मन पर भरम का, निभाना सीख जायेंगे सच्चा धरम।
नरम पड़ जाये तन, पर न पड़ने देना नरम दिल की बाती को कृपा से अपने।
मन में चलता रहे अनवरत् अजपा जप तेरा, तू सींचना प्यार से दिल को मेरे।
छा जाये जब तम की अंधीयारी बदली, भर देना तब तू ख्यालों से मुझे।
इच्छाओं के तूफां से लड़ते हुये जब टूटेगा दम मेरा, तब तू दिला देना याद तेरी।
कमजोर होऊँगा कितना भी दुनिया की नजरों में, पर रखे रहना मुझपे हाथ तेरा।
डर होगा अगर अंतर के किसी कोने में तो तू उसे प्यार में बदल देना।
लुट जाये चाहे सब कुछ मेरा, पर तेरा साथ कभी ना छूटने देना।
रूठे हुओ को मना लूगा पर दिल जो टूटेगा तो हाथों में हाथ रहते खो दूंगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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बना दे, बना दे, बना दे प्रभु मुझे लायक तेरे।
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