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Hymn No. 2089 | Date: 30-Nov-2000
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संसार रूपी सागर मैं तैर रहा हूँ तेरे नाम के सहारे।
संसार रूपी सागर मैं तैर रहा हूँ तेरे नाम के सहारे।
नैय्या है, मंझधार में, कही दूर तक नजर न आये किनारा।
आस है माया के इस झांझावात से उबरके आऊँगा पास तेरे।
शऊर ना है पर कड़ी मशक्कत से काटूँगा इच्छाओं के पाश को।
रोके रुक सकता नहीं तेरे दास को जो है विश्वास तू साथ है।
जो भी होगा मेरा हाल वचन अनुरुप करके हर करम सौपूंगा फल तुझे।
वरण किया है तेरा, न लूंगा शरण तेरे सिवाय कही भी।
ऐसे या वैसे तय है मेरा मिटना, मिटने से पहले मिलन होगा तुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह