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Hymn No. 2090 | Date: 01-Dec-2000
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हौसलाये प्यार की जो देता है हर पल दिल को नया आयाम।
हौसलाये प्यार की जो देता है हर पल दिल को नया आयाम।
फूट पड़ते है नये नये नगमे होश रहते हुये बेहोश सा रहता है उम्मर खैय्यास।
पहले तो नजर मिलती है, फिर उमड़ पड़ता है दबा हुआ प्यार।
झरते है झरने नयनों से, दबाये न दबतीं, फफक पड़ती है यादों से।
बैचेनी का आलम होता है, पास रहते हुये जो दूर होता है बालम।
सालती है दिल को न जाने कौन कौन सी बात, करवटों में गुजरें सारी रात।
उठना बैठना प्यार बन चुका है, प्यार को दे देता है जमाना मगरुरियत का नाम।
प्यार करने वाला हूँ न बन सकता कभी चालाक, चालाकी भी बयाँ कर जाती है बाँवरेपन का।
वो तो माहिर बनाना चाहे प्यार में, बिन माहिर बने आता नहीं हाथों में यार।
खार खाऊँ अपने आप से, क्यूँ अब तक मिलन हो न पाया याद से।
- डॉ.संतोष सिंह
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