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Hymn No. 2091 | Date: 01-Dec-2000
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जला दो, जला दो सरेआम लोगों मुझे, उड़ा दो उड़ा दो मेरी खाक को हवाओं में।
जला दो, जला दो सरेआम लोगों मुझे, उड़ा दो उड़ा दो मेरी खाक को हवाओं में।
नेस्तोनाबूद कर दो मेरी पहचान को, मिटा दो मुझको भूतकाल के पन्नों से।
धोखा दिया है परम् को, उसकी सजा जो भी हो वो कम है।
नमीं आयेगी जिसकी आँखो में, उसको भी मिलेगी बहुत सजा।
रजा की मुंहर है पिता की, जो बजायेगा उसका हुक्म उसके गीत को गायेगी दुनिया।
जश्न होगा उस दिन दुनिया में, जिस दिन जलाया जायेगा तन मेरा।
चारों और हर्ष और उल्लास होगा, मनायेगे हर धर्म मिलके एक नया पर्व।
घाक जमेगी उसकी ऐसी, तीनों काल में हो जायेगा नाम जयजयकार।
यारों माफ करना मै तो न था नफरत के लायक, दे दिया इसमें इतनी पहचान।
कितनी दरियादिली है उसकी इक गुमनाम को दे दिया पहचान।
- डॉ.संतोष सिंह
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