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Hymn No. 2092 | Date: 04-Dec-2000
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हमने कब कहाँ, कर तू कुछ ऐसा हमारे वास्ते।
हमने कब कहाँ, कर तू कुछ ऐसा हमारे वास्ते।
छोड़ दिया सब कुछ तुझपे, रह लेने तेरे वास्ते।
दास्तां तो वही है घिसी पिट्टी मिलते ही तुझसे जांन आ गयी।
सदियों से सोयां हुआ था, धीरे धीरे भान आने लगी।
जो न सोचा वो ख्वाब होने लगे साकार जुड़ते ही तुझसे।
फरक का बेड़ा हो गया गरक, नरक में मिलने लगा स्वर्ग का मजा।
किया धरा है सब कुछ तेरा, पर भक्ति का जाम पिलाके।
दागदार के दामन के दाग को मिटाके, स्वीकारा तूने प्यार से।
यार तू करना विश्वास हमारा, उठने न दूंगा उंगली प्यार में तेरे।
सब कुछ झेलते हुये, तेरे प्यार को खिलने से न रोकूंगा कभी।


- डॉ.संतोष सिंह