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Hymn No. 2098 | Date: 17-Dec-2000
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हमे न पता था अंजाम होता है इतना बुरा राहे मोहब्बत में।
हमे न पता था अंजाम होता है इतना बुरा राहे मोहब्बत में।
आँखो में होगे आँसू, जरूर, पर दिल न है टूटा अभी।
मन में कई है दुविधायें, चूंकि अन्जान रहा हूँ प्यार की रस्मों से।
तोड़ा होगा लाख कसमें, कसमें से दूर न होना चाहा कभी तुझसे।
दोष न है इसमें कुछ तेरा, पूर्व में हमने क्या किया कुछ न है पता।
पर इतना पता है, प्यार तेरा सताये दिन रात दिल को मेरे।
घिरा रहूँ कितना भी दुनियायी पहलुओं से तेरे ख्याल न होते है खल कभी।
जिस्म होगे दो जरूर, पर अंतर तो है इक दूजे के सदा से।
जश्न मनाऊँ या गमीं बेमतलब सा लगता है सब, नमी आती है तुझसे।
बेदम ये इंसा दमदार हो जाता है, आँखे जब चार होती है तुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह