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Hymn No. 2100 | Date: 19-Dec-2000
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यूं तो गुजरने को गुजरता है सारा संसार हर पल।
यूं तो गुजरने को गुजरता है सारा संसार हर पल।
पर बन जाता है जो मालिक के आँखों का नूर।
गुजरके गुजर न पाता है वो कभी संसार से।
अनंत में ठहर जाती है उसकी सत्ता बेसत्ता बनने पे।
अनजाने में राज कायम कर जाता हैं हर दिलपे।
उसके प्यार के आगे नतमस्तक हो उठते है श्रध्दा से हर माथे।
अनजाने में प्यार की कली खिल उठती है हर दिल में।
मुस्कान करती है बया, निर्मल प्यार की बयार बहने की।
जीव अजीब हर कोई तिरता है आनंद में रहने पे उसके।


- डॉ.संतोष सिंह