VIEW HYMN

Hymn No. 2101 | Date: 20-Dec-2000
Text Size
दौड़ पड़ता है मन मेरा तेरे पास मुझसे पहले।
दौड़ पड़ता है मन मेरा तेरे पास मुझसे पहले।
खिंचा चला आता हूँ, कदम जो बिन रूके उठते है ओर तेरे।
कसम से दिल को तेरी याद न सताये ऐसा कभी नहीं होता।
छू जाता है हमको जब जेहन में उभरे प्रियतम तसवीर तेरी।
नजरें ढूँढ़ती है हर कही, शायद आ जाये नजर जो तू।
कितना भी हो न तेरे वास्ते, पर बेभानी में सोचता हूँ हाँ।
पड़ाव दर पड़ाव लगता है मुझे, तू ही है मेरा हमसफर।
मुकाम मिल चुका पर हो अभी पूरा सफर है बाकी।
कोई कुछ भी कहे बनाना चाहता हूँ तुझे अपना साकी।
दम तोड़ने तक पीता रहूंगा, पर पैमाना भरा हो प्यार से तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह