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Hymn No. 2103 | Date: 21-Dec-2000
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कुछ कहो तो मैं कहूँ कुछ तुमसे, हर वक्त कहना हो मुझमें हो कैसे।
कुछ कहो तो मैं कहूँ कुछ तुमसे, हर वक्त कहना हो मुझमें हो कैसे।
सुनाया बहुत कुछ हाल अपना, अब तो दिल चाहे सुनना कुछ तुमसे।
ऐसी न है कोई जिद, जो तू सुनायेगा तो ही सुनायेगे हाले जिंदगी का अपने।
सपनों की दुनिया से निकलके बाहर, यथार्थ में कुछ जानना चाहता हूँ तुझसे।
यूं ही न होता है कुछ, होने के पीछे कुछ न कुछ जुड़ा होता है जिंदगी से।
माना हमारा कहना करना कुछ न मायने रखता है, ओ सयाने तेरे सामने न है कभी कुछ।
हमारे गमों में न कभी कोई दम था, प्रिय हंसते – हंसते दे दे चाहे तू कोई उपनाम इसे।
संजदा करता हूँ तन – मन से, दिल का हाल न जाना कभी हमने।
जब सब हो जायेगे लायक तो जग में कौन निभायेगा किरदार मसखरे का।
माना हमारी बातों के लाखों जवाब है तेरे पास, पर ये भी सच है लाजवाब न करना चाहा कभी तुझे।


- डॉ.संतोष सिंह