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Hymn No. 2104 | Date: 22-Dec-2000
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प्रभु। जब सब अच्छे तेरे होगे, तो हम बूरों को कौन अपनायेगा।
प्रभु। जब सब अच्छे तेरे होगे, तो हम बूरों को कौन अपनायेगा।
जब सिर्फ सर्वश्रेष्ठ तेरे पास होगे आने लायक, तो हम अधम दर्जेवाले किसके पास जायेगे।
मुंह फिर लेगा सारा जहाँ एक बार चल जायेगा, तू मुँह फेर लेगा तो कही भी न रह पायेगे।
दुनिया के पास दुनिया भर का बहुत होगा, ये निठल्ला न कर सका कभी कुछ का जतन।
तेरे दर पे, आके लोग झोली भर – भर के चले जाते है झोली भरते तो हम भी है पर रहती है खाली
देता न हूँ दोष किसीको, पर आता है अपने आप पे रोष बहुत।
रोके ऊँगली न दिखाता हूँ किसीको, जिम्मेदार हूँ अपने किये हुये का।
बचने की गुहार लगाने नही आया हूँ, हर गम को मुस्कराते हुये गुजार देना चाहता हूँ।
ऐतराज न है किसी से, डर – डरके वीतरागी का राग अपनाना नहीं चाहता।
मैं करता हूँ सलाम हर उसको, जो इन सबसे होके पहुँचते है पास प्रिय तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह