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Hymn No. 2109 | Date: 26-Dec-2000
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नजाकत, नफासत ऐसी कौन सी अदा हो जो चुरा ले जाये दिल को तेरे।
नजाकत, नफासत ऐसी कौन सी अदा हो जो चुरा ले जाये दिल को तेरे।
मस्तीखोर भौंरा हूँ तेरी बगियाँ का जो चुरा ले जाये दिल को तेरे।
रहता हूँ हर पल प्यार के तरन्नुम में, कितना भी रहोगे सतर्क चुरा ले जाऊँगा तुमको।
बेफिकरी कह ले या मुरखाई आदी हो चुका हूँ ठोकरे खाके कुछ नया कर दिखाने का।
सनम लिया है जनम तेरे वास्ते बचके रह तू कितना, बच न पायेगा इस आशिक से।
परवाने जलके खाक हो जाते है हम जलेंगे जरूर पर धधकेंगे सीने में तेरे प्यार बनके।
खामोश रहके क्या करेंगे प्यार की दास्ताँ को, निगाहो से निगाह मिलते हो जायेगी मुश्किल तुझे।
जानम जब तक न जाना था बात, दीगर थी, बिन सिसके प्यार में गमों को पीना सीखा।
रीझा न है तू तो रिझाये न छोडूंगा, प्यार में न को हाँ में बदलने का राज जो जान गया।
तसदीक कर दे रहा हूँ तुझे, अगर जो तू न था तकदीर में तो तकदीर बदलना आ गया हमको।
- डॉ.संतोष सिंह
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