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Hymn No. 2122 | Date: 06-Jan-2001
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धुन में रहना सीखो प्रभु के, धुन में जीवन जीना सीखो प्रभु के।
धुन में रहना सीखो प्रभु के, धुन में जीवन जीना सीखो प्रभु के।
धुन में जो रहोगे उसके कर दिखाओगे मुश्किलों से भरे हर कार्य को।
धुन है कामधेनु की तरह, पाते है संसार में सब कुछ धुन वाले।
धुन में रहने वाले कर जाते है पार जीवन सागर का बिन डरे।
धुन के रहते है जो पक्के छुड़ा देते है वो अच्छो अच्छो के छक्के।
धुन में रहने वालों के आगे चलती नहीं प्रभु की ढलना पड़ता है अनुरूप इनके।
धुन में रहने वाले आदि न होते है किसीके, ये तो रहते है मस्त अपने धून में।
कहना करना पड़ता है तन को, मन को भी साथ चलना पड़ता है धुनवालों के।
धुन वाले आते नहीं है किसीके हाथ, चाहे कितना भी रहे साथ।
दाद दो या मत दो बनने बिगड़ने से परे रहते है मस्त अपनी धुन में।


- डॉ.संतोष सिंह