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Hymn No. 2124 | Date: 09-Jan-2001
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चैन नहीं है दिल को जबसे नैन लड़े है तुझसे।
चैन नहीं है दिल को जबसे नैन लड़े है तुझसे।
जीना हुआ मेरा मुहाल, जबसे हुआ हलाल प्यार में तेरे।
दोष न देता हूँ तुझको, होश खो देता हूँ पाके तुझको।
गिरा हुआ था इतना नीचे, उठना नामुमकिन लगता था।
नजरे मिली हुआ ऐसा असर, तू दिल में धर कर गया।
इबादत तेरी हमारे वश की बात न थी, फिर भी इनायत तू कर गया।
प्यार का झूठा वास्ता देके, कर जाते है कई बार अदावत तेरे साथ।


- डॉ.संतोष सिंह