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Hymn No. 2129 | Date: 11-Jan-2001
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सलामत रहे तेरा जीवन चाहे चढ़ जाये बली मेरी संहस्त्रों बार।
सलामत रहे तेरा जीवन चाहे चढ़ जाये बली मेरी संहस्त्रों बार।
नजर ना लगे तुझे कभी, चाहे जिंदगी भर के लिये सुलगा दिया जाऊँ।
रहमो करम बरसे परम तेरी तुझपे, अगर कुछ खुशियाँ हो तो करता हूँ न्योछावर तुझपे।
नाम पे तेरे लगा न पाऊँ दाग, चाहे मरना पड़े मुझे आज का आज।
तुझे संवारने के वास्ते बाज आ जाना चाहता हूँ चाहे अनचाहे करतूतों से अपनी।
दाग न लगने दूं तेरे नाम पे, कर जाना चाहूँ कुछ ऐसा काम।
जीवन पाया है तेरी कृपा से, जीवन को होम कर देना चाहूँ तेरे नाम पे।
बट्टा लगने नहीं देना चाहता तेरी साख पे, चाहे हो जाये जीवन राख।
तेरा दास बनके जीवन गुजारना चाहता हूँ, करना न चाहूँ कोई और काम।
हसरतें इक् - इक् करके मिटती जा रही है, तेरे सिवाय करना न चाहता कोई कसरत।


- डॉ.संतोष सिंह