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Hymn No. 2130 | Date: 12-Jan-2001
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गुनगुनाऊँ बनके भौरा तेरी बगियाँ में, खिल जाऊँ कमलवत् तेरी मायावी दुनिया में।
गुनगुनाऊँ बनके भौरा तेरी बगियाँ में, खिल जाऊँ कमलवत् तेरी मायावी दुनिया में।
जनमों जनम से चढ़ाया हुआ तेरा कर्ज चुका दूँ तुझमें ही घुलमिल के।
बयार बनके बहूँ वादियों में, जो मजबूर कर जाये तेरे दिल को नैन मटक्का करने से।
कदम दर कदम भरूँ थिरकते हुये, जैसे कोई बावरी नाचे अपने प्रियतम को पाके।
कोई न सोच विचार हो, दिल से निकलते सुर की गूज सुन थिरक जाये कदम तेरे।
भाव विभोर होके बदल जाऊँ आसुओं की बूंद में न टपक चरणों में तेरे।
श्रध्दा का जोर मिटा जाये हर उस पहलू को जो तेरा बनने से रोक रही हो मुझको।
कानो कान खबर न हो किसीको रहबर तेरे प्यार का महासागर ठाठ़े मारे मेरे दिल में।
जीने के लिये जरूरत न हो किसीकी पल भर का वियोग हो दिल में तो हो जाये मौत उसी पल।
सौत मेरी कोई नही सौत बना बैठा हूँ खुदका, तेरे रहते न जाने कैसे अलग रहता हूँ तुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह