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Hymn No. 2132 | Date: 14-Jan-2001
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बड़ी मुश्किल बात है इतना कमजोर क्यूं बनाया तूने हमको।
बड़ी मुश्किल बात है इतना कमजोर क्यूं बनाया तूने हमको।
अपनो की छोड़ परायों का दुःख भी देता है झकझोर, सम्भाले नहीं सम्भलता।
कांप जाता हूँ, देखके लीला तेरी, कोई भी दिखावा न कर पढ जाता हूँ पिला भीतर से।
सोचता हूँ ये कैसा खेल है, जिसने बना डाला जीवन को बंधक मौत की जेल में।
भागना चाहे तो भाग न सके तेरा अपराधी, कैंद कर रखा है जो तन की जेल में।
सुनिश्चित दिन बिन् किसी हेर – फेर के तू दे डालता है फांसी।
उफ भी करने का वक्त नहीं रहता, हम सब दिया हुआ तेरा किरदार हैं निभाते।
बड़ा मजबूत है दिल तेरा, जो ऐसे नाटको से तेरा जी है बहलाता।
बताया तो तूने बहुत कुछ है कर्मों और माया के नाम पे, फिर भी राहत नही पाता मन मेरा।
दो चार माना परे है तेरे खेल से, पर दो चार नियति तो न बन सकते दुनिया के।


- डॉ.संतोष सिंह