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Hymn No. 2135 | Date: 17-Jan-2001
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क्यूँ कर रहा है तू मुझसे ऐसी छेड़ छाड़, मत बना दुनिया की भेडचाल का हिस्सा।
क्यूँ कर रहा है तू मुझसे ऐसी छेड़ छाड़, मत बना दुनिया की भेडचाल का हिस्सा।
मुझे ना स्वीकार है कर्मों के अधीन रहना, बहने दे मुझे बनके तेरे प्यार का हिस्सा।
कही भी अटक के अगर भटक जाता हूँ, ऐसा लगता है कितनी बड़ी चोट खा गया हूँ।
मायने न रखती होगी तेरे वास्ते मेरा दर्द, हर दर्द सहके सिसक पड़ता हूँ तेरी नजरअंदाजगी।
जीना चाहता हूँ हर लम्हा तेरे प्यार को याद करके, किसी फंदे में न फंसते हुये निभाऊ देखके हर वास्ता।
ज्यादा क्या कहूँ कहना न आये जो, पर हम तो बनके रहना चाहते है तेरा प्यारा।
खताये तू मेरी माफ कर या न कर, पर दिल में उमड़ते हुये प्यार को मत रोकना।
बरसाऊँगा आँखो से पर तुझे न दरसा के, भीगोते रहूंगा दिल को तेरी याद में डुबोते हुये।
दागदार होगा मेरा जीवन, सजा पाने से गुरेज न करूंगा, पर दाग न लगने दूंगा दामन पे तेरे।
श्वास दर श्वास चढ़ाऊँगा अपनी बलि तेरे नाम पे, हो जाये चाहे कुछ मुरझाने न दूंगा प्यार की कली को।


- डॉ.संतोष सिंह