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Hymn No. 2137 | Date: 18-Jan-2001
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हैं सांवले सलोने बसी है तेरी मुरतिया मन मंदिर में मेरे।
हैं सांवले सलोने बसी है तेरी मुरतिया मन मंदिर में मेरे।
बाट जोहूँ कब तू प्रकटेगा सम्मुख मेरे, अल्हादकारक होगा वो पल।
धड़कन मेरे दिल के हो जायेगी तेज, प्रकटना देखके भूल जायेगी धड़कन।
श्वास हो जायेगी निश्वास, जब दिल को होगा विश्वास तू रहता है सदा साथ।
फाँस ले तू मुझे या बढ़ा दे प्यार इतना, कि फांस सकूं मैं तुझे।
मन की मौजों पे थिरकते हुये, थिरकाता रहूँ मैं तुझे अपने संग।
सपनों में आना जाना बहुत हो गया, अब तो साकार होके आना होगा।
तू है मेरा मन बसियाँ आ मेरे रंग रसिया, रंग ले मुझे तेरे प्यार के रंग में।
बावरापन कह या सयानापन् काबिल तो नहीं तेरे, ऊपर अब छोड़ना नामुमकिन है तुझे।
सब कुछ पाना चाहता हूँ अपना सर्वस्व अर्पित करके तुझको, चाहे मोल न हो मेरा।


- डॉ.संतोष सिंह