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Hymn No. 2140 | Date: 20-Jan-2001
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जो कुछ नया है आज, वो कल है पुराना।
जो कुछ नया है आज, वो कल है पुराना।
जिंदगी गुजर जाये, देखते देखते दुनिया बदल जाये।
रुकी न है किसीके वास्ते जो साथ चले हाथ मैं है उसी के।
तदबीर है किसी की तकदीर, तकदीर में तदबीर नहीं तो कोई क्या करेगा।
पार पाना है सबको इससे, चाहे डरके करो या लड़के।
खेल समझो या समझदारी, निभाये बिन चलता नहीं काम।
दाम देना इसका सबके वश की बात नहीं, पर निभाना पड़ता है सबको।
रब भी जब आये इस जग मैं तो निभाना पड़ता इस रस्म को।
करके भी सब सौंपा जिसने रब को, जीता वो खेल हारके जिंदगी को।


- डॉ.संतोष सिंह