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Hymn No. 210 | Date: 15-Jul-1998
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खोये हुऐ है हम, अपनी दुनियादारी में सदियो से;
खोये हुऐ है हम, अपनी दुनियादारी में सदियो से;
याद दिलाया है तूने, सोते से उठाया है हमको ।
तेरे बिन कुछ भी नहीं थें हम;
तुझको पाके कुछ भी ना रहना चाहते है हम ।
हर पल बदला हमने अपना गैर - ठिकाना;
करूणामय तू है, जिसने बार – बार दिखलाया, घर का रास्ता ।
भूले थे हम तुझको, भूला ना था तू हमको;
प्रेमवश तूने किया क्षमा हमको सदा ।
संग – संग तेरे चलने को तैयार है हम;
सदा के लिये तुझको अपनाना चाहते है हम ।
तेरे सिवाय् सब कुछ अर्पित कर देना चाहते है;
हमें याद नहीं है अपनी सब भूलें।
फिर भी प्रायश्चित करने को दिल करता है;
तेरी यादों को सजाके, सब कुछ भुलाके;
तेरे चरणों में खुदको अर्पित कर देना चाहते है ।
प्यार हमारा तुझसे था, तुझसे ही रहेगा;
तू ना कभी हमसे दूर हुआ था, ना ही हमको होने देगा।


- डॉ.संतोष सिंह