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Hymn No. 2142 | Date: 23-Jan-2001
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ऐ छैल छबीले न लड़ा तू हमसे आँखे लहूलुहान कर जाती हें सरेआम ।
ऐ छैल छबीले न लड़ा तू हमसे आँखे लहूलुहान कर जाती हें सरेआम ।
ऐ रंग रंगीले मत ढा तू कयामत इतनी हो जाये मुहाल जीना मेरा।
ओ गोरे बांके मत कर वार इतने प्यार से हो जाये बेकरार प्यार में तेरे।
ऐ कान्हा न लुभा मेरे मन को तू इतना बैरी बन जाऊँ मैं अपने आप का।
ओ सावले सलोने न खींच तू इतना पास अपने, लग जायेगा इल्जाम न जाने कौन सा।
ऐ मन मोहन मत कर इतना सीना जोरी, टूट जायेगी श्वासों की डोर जो बंधी है तुझसे।
ऐ रास बिहारी मत तू बजा इतनी मुरलिया, नाचते नाचते छुट जायेगे प्राण मेरे।
ओ मन बसिया मेरा टोकना न हैं रोकना ये तो लगी अगन को दबाके और भटकाता है।
ओ घनश्याम तुझे प्यार में बंधके आना पड़ेगा मेरे दिल से गूंजे किसी और नाम से।


- डॉ.संतोष सिंह