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Hymn No. 2143 | Date: 24-Jan-2001
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चैन छीन लेती है तेरी पल दो पल की यादें।
चैन छीन लेती है तेरी पल दो पल की यादें।
न जाने कितना सताती है हमको तेरी एक नजर।
विस्मृत सा हो जाता हूँ जब ख्वाबों में देंखता हूँ तुझको।
सुहाने लगने लगते है वो पल जब मुलाकात हो जाती है।
हर मूर्त जीवत हो उठता है, जब उनमें पाता हूँ तुझको।
इल्जाम भी लगते है नगमें, जो लेके तुझे लगाये जाते है।
सताना किसीका लगता नहीं, हम तो सताये है तेरे प्यार के।
बुझती नही मेरी प्यास, जब तक मिलता नही तेरा समाचार।
चाहे सच्चा हूँ न हूँ, पर तेरे बगैर लगता नही कुछ अच्छा।
कितना भी हो गयी होगी उमर, पर तेरे पास आने पे हो जाता हूँ बालक।


- डॉ.संतोष सिंह