VIEW HYMN

Hymn No. 2145 | Date: 26-Jan-2001
Text Size
जन्म दर जन्म गुजरते जाये मिलती नहीं तेरी संगत बिन तेरी कृपा के।
जन्म दर जन्म गुजरते जाये मिलती नहीं तेरी संगत बिन तेरी कृपा के।
इक बार जो मिल गया है, बदल जाती है रंगत बिन कहे जीवन की।
मत पूछ बदलता नहीं कुछ जीवन में फिर भी आनंद उमड़ता है यूं ही।
चैन रहता है मन को फिर भी बेचैन रहता है दिल, कुछ भी करके पाना चाहे साथ तेरा।
रहता है हर पल इसी कयास में, जिंदगी के न जाने किस मोड़ पे हो जाये मुलाकात।
गोया ऐसा न है न रहते हुये भी रहता है दिल को अहसास तेरे साथ होने का।
गुजर जाता है न जाने जीवन किस किस मोड़ से, सकून आता है तेरे पास पहुँचने पे।
अधूरे है हम तेरे बिना, पूरा होना चाहते है पाके तुझे।
सौगात जो चाहे तू वो दे देगे, चाहे औकात हमारी हो या न हो।
जीवन का मकसद बन चुका है तू, होगे कितने भी विरोधाभास पर बदल न कसता है अब ये।


- डॉ.संतोष सिंह