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Hymn No. 2146 | Date: 26-Jan-2001
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तड़प तू कायम रखना मेरी, चाहे हो जाये कितनी भी मुलाकात।
तड़प तू कायम रखना मेरी, चाहे हो जाये कितनी भी मुलाकात।
बेचैनी बनाये रखना दिल में, जिस दिन हो न मुलाकात आये न नींद रात को।
लम्हा गुजारूं यादों में तेरी, सिसकना पड़े चाहे कितना भी ख्वाबों में।
कामयाबी जुड़ी है तुझसे, तू मिला तो समझूंगा जीत लिया सारे ब्रम्हाण्ड को।
गुरेज न है हमको किसी मुलाकात को लेके, पर मिलना तय हो तुझसे।
माना जाल है अभेद माया का, गुस्ताखी माफ करना हमपे तो सवार है भूत प्यार का।
गुफ्तगू करता हूँ दिल से अपने, तब याद दिलाये मन दिल तो हार चुका हूँ हाथों उसके।
तू कितना भी दे दे आश्वासन, पर लगता नहीं विराम हमपे वो तो मिलना चाहे कही कभी भी।
कमियों से न किया कभी गुरेज, आज जो कमी न रहती तो तू क्यू रहता दूर होके।
सौंप दिया अपने आपको तुझको, पर पूरे करने होगे मेरे दिल के अरमानों को अगर लगे ठीक तुझे।


- डॉ.संतोष सिंह