VIEW HYMN

Hymn No. 2153 | Date: 04-Feb-2001
Text Size
सजाऊँ तेरे रूप को ऐसा, सजाते सजाते खो दूँ सुध बुध अपनी।
सजाऊँ तेरे रूप को ऐसा, सजाते सजाते खो दूँ सुध बुध अपनी।
जो छवि है अंकित चित्त पे मेरे, हूबहू हो तू सामने मेरे।
देख देखके निकले गीत मस्ती के, सवार रहूँ तेरे प्यार की किश्ती पे।
चलाना तू तीर नयनों से, लहूलुहान करना दिल को पल पल मेरे।
बेदम हो जाये तन, पर प्राण प्रतिष्ठा करूंगा तुझमे।
अर्पित करने को रह न जाये कुछ, समर्पित कर दूं हर श्वास तुझेको।
भले मेरा करना हो पर मन ही मन तेरा कहना हो।
नौबत आ जाये चाहे कुछ भी इस तन पे, होने न देना खंडित विश्वास तू।
भले हो दुनिया की नजरों में दो, पर अंतर में रहना तू एक।
चढ़ जाये मेरी बलि पर चलने न देना तू किसीकी मुझपे कभी।


- डॉ.संतोष सिंह