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Hymn No. 2155 | Date: 08-Feb-2001
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भर दे प्रभु प्यार इतना दिल में, जलूं तेरे सम्मुख अखंड ज्योत बनके।
भर दे प्रभु प्यार इतना दिल में, जलूं तेरे सम्मुख अखंड ज्योत बनके।
तोड़ दे मेरे अंदर के सारे अहम् को, धूंप की तरह जलके राख बनके गिरूं कदमों में तेरे।
मिटा दे मेरे भीतर के सारे द्वेष को लोबान की तरह महकूँ सारी फिजा में।
रंग दे मुझे तेरे प्यार के रंग में ऐसा, हर कोई चुटकी में लेके तिलक करें तुझे।
भर दे मेरे अंदर श्रध्दा इतनी, रहूं अक्षत की तरह अखंड सदा।
बना दे मेरे भीतर को कोमल इतनी, हर कोई चढ़ाये चरणों में तेरे फूल की तरह।
भर दे मेरे अंदर मिठास इतनी, बांटा जाऊँ तेरे भक्तों में प्रसाद की तरह।
मिटा दे मेरे अंदर बाहर के सारे फर्क को, चढ़ाया जाऊँ तुझपे चुनरी बनाके।
कर दे तू मुझे अस्तित्व विहीन, तेरे सिवाय न हो मेरा कोई अस्तित्व संसार में।
- डॉ.संतोष सिंह
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राही हूँ अनजान डगर का, करता हूँ प्रयास तेरी और बढ़ने का।
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