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Hymn No. 2157 | Date: 09-Feb-2001
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एक बार तू भी तो बता, क्या सुनना चाहता है मुझसे।
एक बार तू भी तो बता, क्या सुनना चाहता है मुझसे।
एक बार तू भी तो कह क्या कहना चाहता है मुझसे।
वख्त आया नहीं तो वख्त तो है हाथों में तेरे।
माना मैं हूँ असमर्थ, पर तू तो है समर्थ सदा से।
रूठा हो सकता है तू, पर झूठी हो नहीं सकती बात मेरी।
बस तेरी चाहना बदल सकता है संसार को सारे यूं ही।
कुछ न छिपा है तुझमे, दाद देता हूं जब तू अनजान बनता है।
होगी लाख कमी हमारी कोर कसर में योग्य बनाके तू पूरा करा ले।
मेरी हार तेरी हार तो हो नहीं सकती, पर मेरी जीत तो तेरी ही जीत कहलायेगी।
रीत जो भी हो तेरा मंजूर है, पर भर दे दिल में प्रेम के गीत।


- डॉ.संतोष सिंह