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Hymn No. 2160 | Date: 18-Feb-2001
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मैं बनना चाहता हूँ चोर ऐसा, जो चुरा ले जाये तेरे दिल को।
मैं बनना चाहता हूँ चोर ऐसा, जो चुरा ले जाये तेरे दिल को।
मैं बनना चाहता हूँ दिलफेंक ऐसा, जो झुमा ले जाये तेरे मन को।
मैं बनना चाहता हूँ मनमीत ऐसा, जो रहे तू कही भी खबर हो मुझको।
मैं हो जाना चाहता हूँ बेखबर ऐसा, जो रहूँ हर पल चूर तेरे प्यार में रहबर।
मैं करना चाहता हूँ प्यार कुछ ऐसा, जो भूल जाये सब कुछ प्यार में मेरे।
मैं जाना चाहता हूँ भूल दुनिया को, जैसे कभी अलग हुआ न था तुझसे।
मैं अलग हो जाना चाहता हूँ मन से, जब तक रम जाऊँ तेरी रास में।
मैं करना चाहता हूँ वास कुछ ऐसा, जो बुझये जनमों जनम की प्यास मेरी।


- डॉ.संतोष सिंह