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Hymn No. 2161 | Date: 14-Feb-2001
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देखते ही तुझको उमड़ने लग जाते है भाव अनेको दिल में।
देखते ही तुझको उमड़ने लग जाते है भाव अनेको दिल में।
अनायास होने लग जाती है गूंज तेरे नाम की मन में
सच पुंछो तो पलकें पलक झपकाना जाती है भूल, नजरें मिलते ही।
आंखो के कोर हो जाते है गीले श्रध्दा से, न रहती कोई बात अंतर में।
तेरे चरणो को छूने से पहले गिर पड़ता हूँ तेरे चरणों में।
हंसाना चाहता हूँ कुछ भी कहके करके, मायने न रहता है कुछ भी किसी के होने का।
कपटी समझ लो या मसखरा मैं तो बेलाग होके रमना चाहता हूँ प्यार में तेरे।
न जाने कितनी यादें हो जाती है तरोताजा, जब आता है वक्त बिदायी का तेरी।
हूँगा परिपक्व नहीं तेरी नजरों में, पर हूँ सच्चा तेरे वास्ते चाहे अंदाज हो कितना भी।
उलट पुलट हो हालत जीवन में कितना भी, पर जीना चाहता हूँ तेरे अंदाज में जीवन गलत।


- डॉ.संतोष सिंह